| Scoop is a "collaborative media application". It falls somewhere between a content management system, a web bulletin board system, and a weblog. Scoop is designed to enable your website to become a community. It empowers your visitors to be the producers of the site, contributing news and discussion, and making sure that the signal remains high. A scoop site can be run almost entirely by the readers. The whole life-cycle of content is reader-driven. They submit news, they choose what to post, and they can discuss what they post. Readers can rate other readers comments, as well, providing a collaborative filtering tool to let the best contributions float to the top. Based on this rating, you can also reward consistently good contributors with greater power to review potentially untrusted content. The real power of Scoop is that it is almost totally collaborative. Of course, as an admin, you also may pick and choose which tools you want the community to have, and which will be available to admins only. Administrators have a very wide range of customization and security management tools available. All of the administration of Scoop is done through the normal web interface. Scoop will seamlessly provide more options to site administrators, right in the normal site, so the tools you need are always right where you need them. Now, if you're still interested, why don't you try it out? You can download the latest tarball here: scoop_1.1.8.tar.gz Or, you can get more information on how to get the CVS version in the "Where can I get Scoop?" box on the left hand side of our front page We also have a list of sites that use Scoop, so you can see what others have done with it. |
Monday, November 15, 2010
What is Scoop?
Wednesday, November 10, 2010
Tuesday, November 2, 2010
काले धान कि ताकत
भारत के भ्रस्ताचारों कि फिर दुनिया में चर्चा है| कभी नोटों से भरा सूटकेश हवाई अड्डे पर पड़ा है तो कभी तलाशी में नोटों का अम्बार मिलता है कि देश me व्यापारियों ,udhyogpatiyo,नेताओ व ओकर्षाओं के पास kharbon का कला धान हैं|नेता रातो-रात करोडपति बन जाते है |आलीशान bhavan, सैंकड़ो एकड़ भूमि समेत बहुत सी ब्बेनामी संपतिया भी इन लोगो के पास है|यह वह धनराशी हैं जो स्विस अंक में nahi,बल्कि पने ही देश में काले धन्दों में लगी है |यह धनराशी इतनी है कि देश में १०० बड़े बिजली घर और गेल, भेल ,सेल जैसे कई बड़े उपकर्म
Saturday, October 30, 2010
फिल्म समीक्षा
करण जौहर की ‘वी आर फैमिली’ फिल्म हालांकि विदेशी लोकेशन, आकषर्क परिधान और संवादों से सजी हुई है, लेकिन इसमें कुछ भी नयापन नहीं है. इस फिल्म से निर्देशक सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपने करियर की शुरुआत की है. यह फिल्म वर्ष 1998 में आयी जूलिया रॉबर्टस और सुसान सरांडोन की ‘स्टेप मॉम’ के पृष्ठभूमि पर बनी है.
फिल्म की शूटिंग ऑस्ट्रेलिया में की गयी है, जिससे इसके दृश्य काफी आकषर्क हैं. फिल्म का कथानक और अधिकांश संवाद ‘स्टेप मॉम’ फिल्म से लिया गया है जिसे भारतीय रंगों में रंगा गया है. इस फिल्म की कहानी माया (काजोल) उसके तलाकशुदा पति अमन (अर्जुन रामपाल) और उनके तीन बच्चे एलिया (अंचल मुंजाल) अनुष्का (नोमीनाथ गिनसबुर्ग) और अंजलि (दिया सोनेचा) की है.
माया और अमन तीन वर्ष से एक-दूसरे से अलग होने के बाद खुशी से अपने परिवार और बच्चों के साथ रह रहे हैं. कहानी में एक नया मोड़ तब आता है जब अमन अपनी गर्लफ्रेंड श्रेया (करीना कपूर) से बच्चों को मिलवाता है. बच्चे श्रेया को पसंद नहीं करते हैं. माया भी अपने बच्चों की जिंदगी में श्रेया के आने से खुश नहीं होती है, लेकिन जब माया को लगता है कि उसके पास ज्यादा समय नहीं है तब वह अनिच्छा से श्रेया को जगह देने का फैसला करती है.|
फिल्म की शूटिंग ऑस्ट्रेलिया में की गयी है, जिससे इसके दृश्य काफी आकषर्क हैं. फिल्म का कथानक और अधिकांश संवाद ‘स्टेप मॉम’ फिल्म से लिया गया है जिसे भारतीय रंगों में रंगा गया है. इस फिल्म की कहानी माया (काजोल) उसके तलाकशुदा पति अमन (अर्जुन रामपाल) और उनके तीन बच्चे एलिया (अंचल मुंजाल) अनुष्का (नोमीनाथ गिनसबुर्ग) और अंजलि (दिया सोनेचा) की है.
माया और अमन तीन वर्ष से एक-दूसरे से अलग होने के बाद खुशी से अपने परिवार और बच्चों के साथ रह रहे हैं. कहानी में एक नया मोड़ तब आता है जब अमन अपनी गर्लफ्रेंड श्रेया (करीना कपूर) से बच्चों को मिलवाता है. बच्चे श्रेया को पसंद नहीं करते हैं. माया भी अपने बच्चों की जिंदगी में श्रेया के आने से खुश नहीं होती है, लेकिन जब माया को लगता है कि उसके पास ज्यादा समय नहीं है तब वह अनिच्छा से श्रेया को जगह देने का फैसला करती है.|
Friday, October 29, 2010
राधा कुण्ड कैसे बना
मान्यता है कि अहोई अष्टमी पर्व द्वापरयुग में श्रीकृष्ण और राधा की लीला से संबंधित है। यह कथा बड़ी रोचक है।
पहले बना श्यामकुंड : राधा कुंड श्याम कुंड के बनने का परिणाम था। एक कथा के अनुसार, कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए ब्रज में अरिष्टासुर को भेजा। भयानक सांड़ का रूप धारण किए उस दैत्य ने श्रीकृष्ण पर आक्रमण किया, परंतु वह उनके हाथों मारा गया। अरिष्टासुर का वध करने के बाद जब रात में श्रीकृष्ण राधारानी और गोपियों के साथ रासस्थल पहुंचे, तो भगवती राधा ने सखियों के उकसाने पर कहा कि आज आपने एक वृषभ की हत्या की है, अत: आपको प्रायश्चित करना होगा।
कथा के अनुसार, यह सुनकर योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अपनी एड़ी की चोट से एक विशाल कुंड का निर्माण करके उसमें भूमंडल के सारे तीर्थो का आवाहन कर दिया। देखते ही देखते सारे तीर्थो का जल कुंड में आ गया। श्रीकृष्ण ने कुंड में स्नान किया, जिसका नाम श्यामकुंड पड़ा।
राधारानी ने बनाया राधाकुंड : कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण के कुंड बनाने पर राधाजी अलग स्थान पर कंगन से गड्ढा खोदने लगीं। उनकी सखियां भी उनके साथ जुट गई। वहां भी एक कुंड बन गया, परंतु उसमें जल भरने की समस्या थी। राधा अपनी सखियों के साथ घड़े लेकर मानसीगंगा से जब पानी भरकर लाने को उद्यत हुईं, तो श्रीकृष्ण के संकेत पर समस्त तीर्थ श्यामकुंड की सीमा तोड़कर राधाकुंड में प्रविष्ट हो गए।
ब्रज के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. वसंत यामदग्नि के अनुसार, 'यह घटना कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी की आधी रात को घटी थी। राधाकुंड के निर्माण का कार्य संपन्न होने से प्रसन्न सखियों के मुख से 'आहा वोही' शब्दों का उच्चारण हुआ था, जो बाद में अपभ्रंश होकर अहोई हो गया। इसी कारण कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि अहोई अष्टमी कहलाने लगी।'
इस युग में कुंडों की खोज : कहा जाता है कि द्वापरयुग में बने ये दोनों कुंड श्रीकृष्ण के प्रपोत्र परपोते वज्रनाभ द्वारा महर्षि शांडिल्य की सहायता से खोजकर ठीक कराए गए। कालांतर में ये कुंड पुन: लुप्त हो गए। श्री चैतन्य महाप्रभु ने कालीखेत और गौरीखेत नाम के दो स्थानों, जहां थोड़ा-थोड़ा जल था, को ही क्रमश: श्यामकुंड और राधाकुंड बताया। बाद में श्री रघुनाथदास गोस्वामी जगन्नाथ पुरी से आकर यहां भजन करने लगे। कहते हैं कि मुगल सम्राट अकबर अपनी बहुत बड़ी सेना लेकर यहां से गुजर रहा था। उसकी सारी सेना, हाथी, घोड़े, ऊंट सभी प्यासे थे। अकबर यह देखकर हैरान रह गया कि उसकी सारी सेना के पानी पी लेने के बावजूद सरोवरों में जल का स्तर बिल्कुल नहीं गिरा। कुछ समय बाद बद्रीनाथ की यात्रा कर रहे एक धनी सेठ ने ब्रज में जाकर श्रीरघुनाथदास गोस्वामी के माध्यम से कुंडों का जीर्णोद्धार किया।
राधा-कृष्ण की तरह ही राधा कुंड और श्याम कुंड भी एक-दूसरे के पूरक हैं। कार्तिक के कृष्णपक्ष की अष्टमी अहोई अष्टमी राधाकुंड के निर्माण की तिथि होने के कारण इस दिन यहां मुख्य स्नान होता है। अहोई अष्टमी की अर्धरात्रि इस स्नान का पर्वकाल माना जाता है।
पहले बना श्यामकुंड : राधा कुंड श्याम कुंड के बनने का परिणाम था। एक कथा के अनुसार, कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए ब्रज में अरिष्टासुर को भेजा। भयानक सांड़ का रूप धारण किए उस दैत्य ने श्रीकृष्ण पर आक्रमण किया, परंतु वह उनके हाथों मारा गया। अरिष्टासुर का वध करने के बाद जब रात में श्रीकृष्ण राधारानी और गोपियों के साथ रासस्थल पहुंचे, तो भगवती राधा ने सखियों के उकसाने पर कहा कि आज आपने एक वृषभ की हत्या की है, अत: आपको प्रायश्चित करना होगा।
कथा के अनुसार, यह सुनकर योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अपनी एड़ी की चोट से एक विशाल कुंड का निर्माण करके उसमें भूमंडल के सारे तीर्थो का आवाहन कर दिया। देखते ही देखते सारे तीर्थो का जल कुंड में आ गया। श्रीकृष्ण ने कुंड में स्नान किया, जिसका नाम श्यामकुंड पड़ा।
राधारानी ने बनाया राधाकुंड : कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण के कुंड बनाने पर राधाजी अलग स्थान पर कंगन से गड्ढा खोदने लगीं। उनकी सखियां भी उनके साथ जुट गई। वहां भी एक कुंड बन गया, परंतु उसमें जल भरने की समस्या थी। राधा अपनी सखियों के साथ घड़े लेकर मानसीगंगा से जब पानी भरकर लाने को उद्यत हुईं, तो श्रीकृष्ण के संकेत पर समस्त तीर्थ श्यामकुंड की सीमा तोड़कर राधाकुंड में प्रविष्ट हो गए।
ब्रज के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. वसंत यामदग्नि के अनुसार, 'यह घटना कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी की आधी रात को घटी थी। राधाकुंड के निर्माण का कार्य संपन्न होने से प्रसन्न सखियों के मुख से 'आहा वोही' शब्दों का उच्चारण हुआ था, जो बाद में अपभ्रंश होकर अहोई हो गया। इसी कारण कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि अहोई अष्टमी कहलाने लगी।'
इस युग में कुंडों की खोज : कहा जाता है कि द्वापरयुग में बने ये दोनों कुंड श्रीकृष्ण के प्रपोत्र परपोते वज्रनाभ द्वारा महर्षि शांडिल्य की सहायता से खोजकर ठीक कराए गए। कालांतर में ये कुंड पुन: लुप्त हो गए। श्री चैतन्य महाप्रभु ने कालीखेत और गौरीखेत नाम के दो स्थानों, जहां थोड़ा-थोड़ा जल था, को ही क्रमश: श्यामकुंड और राधाकुंड बताया। बाद में श्री रघुनाथदास गोस्वामी जगन्नाथ पुरी से आकर यहां भजन करने लगे। कहते हैं कि मुगल सम्राट अकबर अपनी बहुत बड़ी सेना लेकर यहां से गुजर रहा था। उसकी सारी सेना, हाथी, घोड़े, ऊंट सभी प्यासे थे। अकबर यह देखकर हैरान रह गया कि उसकी सारी सेना के पानी पी लेने के बावजूद सरोवरों में जल का स्तर बिल्कुल नहीं गिरा। कुछ समय बाद बद्रीनाथ की यात्रा कर रहे एक धनी सेठ ने ब्रज में जाकर श्रीरघुनाथदास गोस्वामी के माध्यम से कुंडों का जीर्णोद्धार किया।
राधा-कृष्ण की तरह ही राधा कुंड और श्याम कुंड भी एक-दूसरे के पूरक हैं। कार्तिक के कृष्णपक्ष की अष्टमी अहोई अष्टमी राधाकुंड के निर्माण की तिथि होने के कारण इस दिन यहां मुख्य स्नान होता है। अहोई अष्टमी की अर्धरात्रि इस स्नान का पर्वकाल माना जाता है।
नहीं पहुंचे किसानों कि सुध लेने
सिरसा २९ अक्टूबर (मनप्रीत,नरेंदर,हरविंदर,बेअंत ) खेरपुर और वेघ्वाला गावों के किसानो को आज शहर के लघुसचिवालय के बाहर धरना लगाये हुए 32 दिन हो चुके है|लेकिन अभी तक सरकार के कानो तक जू तक नहीं रेंगती दिखाई पड़ रही है|
जब हमने जनकल्याण समिति के सदस्यों एडवोकेट अमरिंदर जीत सिंह, दर्शन सिंह और अमरजीत सिंह से बात कि तो उन्होंने बताया कि बीती 18 तारीख को संसद अशोक तंवर के साथ शहर के उपायुक्त सिजी राजिनिकान्थन भी उनके पास आये थे ,वो उन्हें जल्द ही कुछ हल करने का आश्वासन देकर चले गए लेकिन उसके बाद फिर कोर्ट भी उनकी सुध लेने नहीं आये|
किसानो का कहना है कि अगर सरकार अधिग्रहण करना ही चाहती हैं तो उपजाऊ भूमि को क्यों हथिया रही है |अगर सरकार ने अपना अपना रवैया नहीं बदला तो उनका आन्दोलन जारी रहेगा और वे सरकार कि मनमानियों को बर्दास्त नहीं करेंगे |
जब हमने जनकल्याण समिति के सदस्यों एडवोकेट अमरिंदर जीत सिंह, दर्शन सिंह और अमरजीत सिंह से बात कि तो उन्होंने बताया कि बीती 18 तारीख को संसद अशोक तंवर के साथ शहर के उपायुक्त सिजी राजिनिकान्थन भी उनके पास आये थे ,वो उन्हें जल्द ही कुछ हल करने का आश्वासन देकर चले गए लेकिन उसके बाद फिर कोर्ट भी उनकी सुध लेने नहीं आये|
किसानो का कहना है कि अगर सरकार अधिग्रहण करना ही चाहती हैं तो उपजाऊ भूमि को क्यों हथिया रही है |अगर सरकार ने अपना अपना रवैया नहीं बदला तो उनका आन्दोलन जारी रहेगा और वे सरकार कि मनमानियों को बर्दास्त नहीं करेंगे |
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