Saturday, October 30, 2010

फिल्म समीक्षा

करण जौहर की ‘वी आर फैमिली’ फिल्म हालांकि विदेशी लोकेशन, आकषर्क परिधान और संवादों से सजी हुई है, लेकिन इसमें कुछ भी नयापन नहीं है. इस फिल्म से निर्देशक सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपने करियर की शुरुआत की है. यह फिल्म वर्ष 1998 में आयी जूलिया रॉबर्टस और सुसान सरांडोन की ‘स्टेप मॉम’ के पृष्ठभूमि पर बनी है.
फिल्म की शूटिंग ऑस्ट्रेलिया में की गयी है, जिससे इसके दृश्य काफी आकषर्क हैं. फिल्म का कथानक और अधिकांश संवाद ‘स्टेप मॉम’ फिल्म से लिया गया है जिसे भारतीय रंगों में रंगा गया है. इस फिल्म की कहानी माया (काजोल) उसके तलाकशुदा पति अमन (अर्जुन रामपाल) और उनके तीन बच्चे एलिया (अंचल मुंजाल) अनुष्का (नोमीनाथ गिनसबुर्ग) और अंजलि (दिया सोनेचा) की है.
माया और अमन तीन वर्ष से एक-दूसरे से अलग होने के बाद खुशी से अपने परिवार और बच्चों के साथ रह रहे हैं. कहानी में एक नया मोड़ तब आता है जब अमन अपनी गर्लफ्रेंड श्रेया (करीना कपूर) से बच्चों को मिलवाता है. बच्चे श्रेया को पसंद नहीं करते हैं. माया भी अपने बच्चों की जिंदगी में श्रेया के आने से खुश नहीं होती है, लेकिन जब माया को लगता है कि उसके पास ज्यादा समय नहीं है तब वह अनिच्छा से श्रेया को जगह देने का फैसला करती है.|    

Friday, October 29, 2010

राधा कुण्ड कैसे बना

मान्यता है कि अहोई अष्टमी पर्व द्वापरयुग में श्रीकृष्ण और राधा की लीला से संबंधित है। यह कथा बड़ी रोचक है।
पहले बना श्यामकुंड : राधा कुंड श्याम कुंड के बनने का परिणाम था। एक कथा के अनुसार, कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए ब्रज में अरिष्टासुर को भेजा। भयानक सांड़ का रूप धारण किए उस दैत्य ने श्रीकृष्ण पर आक्रमण किया, परंतु वह उनके हाथों मारा गया। अरिष्टासुर का वध करने के बाद जब रात में श्रीकृष्ण राधारानी और गोपियों के साथ रासस्थल पहुंचे, तो भगवती राधा ने सखियों के उकसाने पर कहा कि आज आपने एक वृषभ की हत्या की है, अत: आपको प्रायश्चित करना होगा।
कथा के अनुसार, यह सुनकर योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अपनी एड़ी की चोट से एक विशाल कुंड का निर्माण करके उसमें भूमंडल के सारे तीर्थो का आवाहन कर दिया। देखते ही देखते सारे तीर्थो का जल कुंड में आ गया। श्रीकृष्ण ने कुंड में स्नान किया, जिसका नाम श्यामकुंड पड़ा।
राधारानी ने बनाया राधाकुंड : कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण के कुंड बनाने पर राधाजी अलग स्थान पर कंगन से गड्ढा खोदने लगीं। उनकी सखियां भी उनके साथ जुट गई। वहां भी एक कुंड बन गया, परंतु उसमें जल भरने की समस्या थी। राधा अपनी सखियों के साथ घड़े लेकर मानसीगंगा से जब पानी भरकर लाने को उद्यत हुईं, तो श्रीकृष्ण के संकेत पर समस्त तीर्थ श्यामकुंड की सीमा तोड़कर राधाकुंड में प्रविष्ट हो गए।
ब्रज के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. वसंत यामदग्नि के अनुसार, 'यह घटना कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी की आधी रात को घटी थी। राधाकुंड के निर्माण का कार्य संपन्न होने से प्रसन्न सखियों के मुख से 'आहा वोही' शब्दों का उच्चारण हुआ था, जो बाद में अपभ्रंश होकर अहोई हो गया। इसी कारण कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि अहोई अष्टमी कहलाने लगी।'
इस युग में कुंडों की खोज : कहा जाता है कि द्वापरयुग में बने ये दोनों कुंड श्रीकृष्ण के प्रपोत्र परपोते वज्रनाभ द्वारा महर्षि शांडिल्य की सहायता से खोजकर ठीक कराए गए। कालांतर में ये कुंड पुन: लुप्त हो गए। श्री चैतन्य महाप्रभु ने कालीखेत और गौरीखेत नाम के दो स्थानों, जहां थोड़ा-थोड़ा जल था, को ही क्रमश: श्यामकुंड और राधाकुंड बताया। बाद में श्री रघुनाथदास गोस्वामी जगन्नाथ पुरी से आकर यहां भजन करने लगे। कहते हैं कि मुगल सम्राट अकबर अपनी बहुत बड़ी सेना लेकर यहां से गुजर रहा था। उसकी सारी सेना, हाथी, घोड़े, ऊंट सभी प्यासे थे। अकबर यह देखकर हैरान रह गया कि उसकी सारी सेना के पानी पी लेने के बावजूद सरोवरों में जल का स्तर बिल्कुल नहीं गिरा। कुछ समय बाद बद्रीनाथ की यात्रा कर रहे एक धनी सेठ ने ब्रज में जाकर श्रीरघुनाथदास गोस्वामी के माध्यम से कुंडों का जीर्णोद्धार किया।
राधा-कृष्ण की तरह ही राधा कुंड और श्याम कुंड भी एक-दूसरे के पूरक हैं। कार्तिक के कृष्णपक्ष की अष्टमी अहोई अष्टमी राधाकुंड के निर्माण की तिथि होने के कारण इस दिन यहां मुख्य स्नान होता है। अहोई अष्टमी की अर्धरात्रि इस स्नान का पर्वकाल माना जाता है।               

cute catee

नहीं पहुंचे किसानों कि सुध लेने

 सिरसा २९ अक्टूबर (मनप्रीत,नरेंदर,हरविंदर,बेअंत ) खेरपुर और वेघ्वाला गावों के किसानो को आज शहर   के  लघुसचिवालय  के बाहर धरना लगाये हुए 32  दिन हो चुके है|लेकिन अभी तक सरकार के कानो तक जू तक नहीं रेंगती दिखाई पड़ रही है|
जब हमने जनकल्याण समिति के सदस्यों एडवोकेट अमरिंदर जीत  सिंह, दर्शन सिंह और अमरजीत सिंह से बात कि तो उन्होंने बताया कि बीती 18  तारीख को संसद अशोक तंवर के साथ शहर के उपायुक्त  सिजी राजिनिकान्थन   भी उनके पास आये थे ,वो उन्हें जल्द  ही कुछ हल करने का आश्वासन देकर चले गए लेकिन उसके बाद फिर कोर्ट भी उनकी सुध लेने नहीं आये|
किसानो का कहना है कि अगर सरकार अधिग्रहण करना ही चाहती हैं तो उपजाऊ भूमि को क्यों हथिया रही है |अगर सरकार ने अपना अपना रवैया नहीं बदला तो उनका आन्दोलन जारी रहेगा और वे सरकार कि मनमानियों को बर्दास्त नहीं करेंगे |     

Tuesday, October 26, 2010

फिल्म रिवीऊ ऑफ़ आक्रोश

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प्रोड्यूसर:कुमार मंगत
डायरेक्टर:प्रियदर्शन
कलाकार:अजय देवगन,अक्षय खन्ना,बिपाशा बासु,परेश रावल,रीमा सेन
रेटिंग:2
ऑनर  किलिंग जैसे गंभीर विषय पर फिल्म बनाना कोई आसान काम नहीं है और जब प्रियदर्शन जैसे मंझे हुए निर्देशक ऐसे मुद्दे पर फिल्म बनाएं तो उम्मीद लगाना लाजिमी है|ऐसे में यह सवाल उठाना कि क्या यह फिल्म समाज में फैली इस कुरीति को दर्शाने में सफल हो पाई है? जवाब है नहीं प्रियदर्शन की पिछली दो फिल्मों(खट्टा मीठा और दे दना दन)की तरह आक्रोश भी एक कमज़ोर फिल्म ही साबित हुई है|
अच्छा विषय होने के बावजूद भी यह फिल्म अपने उद्देश्य में सफल होने में नाकामयाब नज़र आती है| कमज़ोर स्क्रीनप्ले और उबाऊ निर्देशन इस फिल्म को बेदम बना देते हैं|फिल्म की शुरुआत में दिल्ली और झांझर के चार मेडिकल स्टुडेंट्स को अगवा कर लिया जाता है|दिल्ली यूनिवर्सिटी के इन मेडिकल छात्रों को बिहार के झांझर से अगवा कर लिया जाता है|इन लड़कों को खोजने के लिए सरकार दो सीबीआई अफसरों को जिम्मेदारी सौंपती है|
सीबीआई अफसरों की भूमिका निभाई है सिद्धांत चतुर्वेदी बने (अक्षय खन्ना)और प्रताप कुमार बने(अजय देवगन)ने|इस हाइ प्रोफाइल केस मिलने से उत्साहित सिद्धांत को शुरुआत में यह केस जितना आसान नजर आता है दरसल उतना होता नहीं है| इस दौरान उसका राजनीतिक व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार से सामना होता है जिससे उसके होश उड़ जाते हैं|
अजातशत्रु(परेश रावल)एक भ्रष्ट पुलिस वाले की भूमिका में हैं जो झांझर में अपनी एक शूल सेना का मुखिया भी है जो समाज के ठेकेदार होने के नाते हॉनर किलिंग कर मासूम लोगों को मौत के घाट उतार देते हैं|
सिद्धांत और प्रताप कैसे इस समस्या को सुलझा पाते हैं और इसमें गीता बनी बिपाशा बासु कैसे उनकी मदद करती हैं|फिल्म में यही दिखाया गया है|गीता पहले प्रताप(अजय देवगन)की प्रेमिका रह चुकी है मगर उसकी शादी जबरदस्ती अजातशत्रु से कर दी जाती है|
फिल्म मध्य में थोड़ी दिलचस्प होती है मगर बाद में कहानी कमज़ोर पड़ जाती है|फिल्म के दूसरे भाग में सबसे चौंकाने वाली बात तब नज़र आती है जब अचानक समाज में अभी तक हर समस्या पर आँख मूंदकर बैठे लोग आवाज़ उठाने लग जाते हैं और न्याय मांगने के लिए सड़कों पर उतर आते हैं|
कमज़ोर स्क्रीन प्ले के चलते फिल्म की कहानी किस दिशा में जा रही है यह समझ ही नहीं आता|फिल्म का कमज़ोर निर्देशन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है|निर्देशक अच्छी कहानी पर पकड़ नहीं बना पाए|फिल्म के डायलॉग्स अच्छे हैं मगर एडिटिंग और अच्छी हो सकती थी|
अभिनय की बात की जाये तो अजय देवगन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गंभीर किरदार निभाने के मामले में वह लाजवाब हैं|अक्षय खन्ना अपने किरदार में बिल्कुल प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं|बिपाशा बासु का भी रोल कोई खास नहीं है हालांकि काफी राज़ उनकी ही मदद से खुलते हैं मगर उनके हिस्से में ज्यादा डायलॉग्स नहीं है|परेश रावल ने अजातशत्रु के रोल में जान डाल दी है| वहीँ रीमा सेन छोटे मगर प्रभावशाली रोल में नज़र आई हैं|कुल मिलकर देखा जाए तो फिल्म कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाएं|
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Monday, October 25, 2010

कोल इंडिया के आइपीओ से निवेशको की तिजोरी भरने के आसार

मुंबई २५ अक्तूबर ( निधि )|जिस तरह से रिलायंस कंपनी के आईपीओ दुनिया में तूफ़ान मचाकर रख दिया था |उसी प्रकार कोल इंडिया भी अपने आइपीओ बाज़ार में उतारकर शेयर मार्किट में हडकंप मचाने वाली हैं लेकिन कोल इंडिया की और से आशा की जा रही हैं कि इन शेयरों के आबंटन के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों कि तिजोरी नकदी से लबखब भरी होगी|

कंपनी के आइपी ओ में शेयरों के लिए भारी होड़ थी और निवेशकों ने अच्छे खासे शेयर खरीदें हैं ||संस्थागतो ने कोल इंडिया में अभी तक १.२१ करोड़ लाख रुपये लगा दिए हैं |बाज़ार में हिस्सा लेने वालों का मानना है कि इन पैसों का कुछ हिस्सा भारतीय ,शेयर बाजारों में लगने वाला हैं और कुछ विशेषज्ञों का मानना हैं कि पूरी कंपनी के अगले आइपीओ के लिए बचाकर रखी जाएगी |

कोल इंडिया के निर्गम का मूल्य सरकार जल्द ही तय करेगी |कंपनी का बाज़ार पूंजीकरण मापा जाये तो यह लगभग १.५५ लाख करोड़ रूपये होगा |इसके बाद यह सातवी सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी बन जाएगी |

संस्थागत निवेशकों ने इस निर्गम में १.२१ लाख करोड़ रुपये कि बोली लगाई हैं और ६९६६ करोड़ रुपये के शेयर ही आबंटित किये जाने हैं |इस तरह उनके पास १.१३ लाख करोड़ रुपये बचेंगे|